स्तनपान
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स्तनपान
जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक, शिशुओं को केवल स्तनपान ही करवाना चाहिए। स्तनपान शिशु के लिए संपूर्ण आहार होता है, और यह उनकी पोषण संबंधी सभी आवश्यक जरूरतों को भी पूरा करता है। साथ ही मां का दूध शिशु के लिए सुरक्षित, स्वच्छ, स्वस्थ और आसानी से उपलब्ध भी होता है, चाहे वे कहीं भी-किसी भी परिस्थिति में रहते हों।
नवजात शिशुओं को जीवन के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराना जरूरी होता है- जिसे स्तनपान की प्रारंभिक शुरुआत या गोल्डन ऑवर्स भी कहा जाता है। नवजात शिशु के जीवित रहने, विकास और वृद्धि के लिए स्तनपान कराना आवश्यक है।
बच्चे के जन्म का शुरूआती समय ही उसके विकास और वृद्धि की नींव रखता है। बचपन का प्रारंभिक विकास ही आपके शिशु की सोचने, समझने, सीखने और व्यवहारिक बदलावों के साथ-साथ उसकी क्षमता को भी तय करता है। बच्चे के जीवित रहने विकास और वृद्धि के लिए स्तनपान बेहद आवश्यक है।
मां का दूध शिशु के स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक तत्व ही नहीं देता, बल्कि यह नवजात को बीमारियों से बचाने वाला नेचुरल वैक्सीन भी है। इसके बावजूद दुनियाभर में लाखों बच्चों को उनके जन्म के शुरूआती 6 महीने में स्तनपान न कराये जाने की वजह से उसके विकास, वृद्धि में उतनी ही देरी होती है। स्तनपान में देरी होने के कारण कई बार तो ऐसे में शिशु के लिए मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है। जन्म के बाद स्तनपान में होने वाली देरी शिशु के जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।
स्तनपान शिशु को जन्म के पहले घंटे से लेकर दो वर्ष की उम्र तक बीमारियों अथवा मृत्यू से बचाता है। मां का दूध सिर्फ नवजात शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि यह मां के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। सफल स्तनपान स्वस्थ और खुशहाल परिवारों के निर्माण में सहायक होता है।
यहां तक कि जब शिशु 6 माह के बाद मां के स्तनपान से नरम और घर के ताजा बने खाने को भी खाने लग जाते हैं, तब भी उन्हें साथ-साथ स्तनपान कराना आवश्यक है। क्योंकि, मां के दूध में शिशु को मिलने वाले जरूरी पोषक तत्व होते हैं।, जो उनकी बढ़ती उम्र अवस्था के दौरान विकास और वृद्धि में सहायक होते हैं।
स्तनपान के बारे में आपको क्या जानना चाहिए
नवजात शिशु के जीवित रहने और विकास के लिए जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराना बेहद जरूरी है। यह शिशु को लंबे समय तक स्तनपान कराने में भी सहायक होता है। मां और शिशु का यह शुरुआती जुड़ाव शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी शुरू से ही मज़बूत बनाता है।
स्तनपान केवल माँ की ही नहीं, बल्कि सभी की ज़िम्मेदारी है। परिवार, सहयोगियों, समुदायों और सरकारें सभी का कर्तव्य है किसभी माताओं को सफलतापूर्वक स्तनपान कराने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायें।
स्तनपान बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण है। माताओं को स्तनपान करने की अनुमति देने के लिए कार्यस्थलों पर निर्धारित आरामदायक कमरा सुनियोजित करें और क्रेच बनाएं।
अच्छे से स्तनपान कराने और शिशु को लैचिंग कराने के लिए अपने शिशु को आराम से अपने शरीर के समीप रखते हुए बाजू में सहारा देकर पकड़े।
केवल स्तनपान: जन्म के पहले घंटे से लेकर 6 महीने तक, केवल स्तनपान ही दें!
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