पू टू द लू अभियान

2013 का एक क्रांतिकारी स्वच्छता अभियान

स्वच्छ भारत की ओर: एक ऐतिहासिक यात्रा

स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में भारत ने एक असाधारण छलांग लगाई है। भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन ने करोड़ों लोगों तक बुनियादी स्वच्छता सुविधाएँ पहुँचाकर देश के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा है।

"स्वच्छ भारत मिशन ने सिर्फ शौचालय नहीं बनाए, इसने सोच, आदतें बदलीं और ज़िंदगियाँ बदलीं हैं।"

'पू टू द लू' एक साहसी पहल की कहानी

यूनिसेफ का 'Take Poo to the Loo' (पू टू द लू) अभियान 2013 में शुरू हुआ और इसने खुले में शौच के खिलाफ मुहिम को एक नई दिशा दी। यह अभियान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के साथ मिलकर चलाया गया।

यह अभियान भारत सरकार के 1999 में शुरू हुए 'संपूर्ण स्वच्छता अभियान' (Total Sanitation Campaign) का ही एक अहम हिस्सा था। इसका लक्ष्य लोगों की सोच बदलना और शौचालय के इस्तेमाल को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाना था।

2015 तक, हमारी 568 मिलियन आबादी के पास शौचालय की पर्याप्त सुविधा नहीं थी। 2019 तक आते-आते स्थिति में बदलाव आया और 45 करोड़ से ज्यादा लोगों को शौचालय की सुविधा मिली। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

स्वच्छ भारत मिशन: फेज़ II: आगे का सफर

यूनिसेफ अब स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण (Phase II) में भी सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है। इस चरण में जोर सिर्फ शौचालय बनाने पर नहीं, बल्कि उनके नियमित इस्तेमाल और पूरे देश में स्वच्छता की आदतें पक्की करने पर है।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में खासकर सबसे कमज़ोर तबकों तक इन बदलावों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

ज़रूरी तथ्य

Bye Bye stinky Poo poster.
UNICEF India

फेज़ II का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य ODF Plus गाँव बनाना है। यानी ऐसे गाँव जो न सिर्फ खुले में शौच से मुक्त (ODF) हों, बल्कि जहाँ ठोस और तरल कचरे का भी सही प्रबंधन हो और गाँव की समग्र सफाई सुनिश्चित हो।

जैव-अपघटनीय कचरा प्रबंधनइसमें मानव, पशु, कृषि और खाद्य कचरे का सही तरीके से निपटान शामिल है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए ज़रूरी है।
गैर-जैव-अपघटनीय कचरा प्रबंधनप्लास्टिक, धातु और ई-कचरे जैसे हानिकारक कचरे का उचित प्रबंधन, जो नदियों, मिट्टी और हवा को प्रदूषित करते हैं।
माहवारी कचरा प्रबंधनयह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य के लिए अभी और ध्यान देने की ज़रूरत है।

आओ साथ मिलकर भारत को बदलें

"मुझे अपने देश की समृद्ध और विविध संस्कृति पर गर्व है। हमारी धरती सुंदर है। हम चाहते हैं कि हमारे भाई-बहन एक स्वच्छ देश में स्वस्थ, खुशहाल और सशक्त जीवन जिएँ।"

स्वच्छता सिर्फ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। जब हर नागरिक मिशन का हिस्सा बनता है, तब बदलाव सच में होता है।

अभियान से जुड़ें

यूनिसेफ 2014 से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के पहले चरण में सरकार के साथ काम कर रहा है। अब दूसरे चरण में भी यूनिसेफ ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के साथ रणनीति बना रहा है और हर ज़रूरी कदम में सरकार को सहयोग दे रहा है।

आप भी इस बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं, क्योंकि स्वच्छता सिर्फ आदत नहीं : यह इज्जत है, सेहत है, भविष्य है।

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