आइए ! समावेशन की हमारी कहानियाँ सुनें 😊

हर बच्चा व युवा बिना किसी भेदभाव, लिंग, जाति, धर्म, विकलांगता, यौन रुझान या हालातों की परवाह किए बगैर सम्मान का हकदार है

By UNICEF India Youth Co-Content Creators and children from across India
Let's come together for every child
UNICEF
20 सितंबर 2024

विश्व बाल दिवस यूनिसेफ का बच्चों के लिए, बच्चों द्वारा किए गए प्रयासों का वैश्विक दिवस है, जो 20 नवंबर को बाल अधिकारों पर कन्वेंशन (सीआरसी) को अपनाने का प्रतीक है। 

इस वर्ष, यूनिसेफ समानता और समावेशन के सकारात्मक संदेश को बढ़ावा दे रहा है - चाहे कुछ भी हो लिंग, जाति, धर्म, विकलांगता, यौन रुझान या अन्य स्थिति, प्रत्येक बच्चे और युवा को सम्मानित महसूस करने का अधिकार है, और उसे सभी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ शामिल होने और संरक्षित करने का अधिकार है।

बच्चे और युवा अपनी आने वाली पीढ़ीयों के लिए अहम मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं और वयस्कों से उनके लिए बेहतर भविष्य बनाने का आह्वान कर रहे हैं। यूनिसेफ इंडिया ने बच्चों और युवाओं को इस बातचीत में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, ताकि वे एकसमान और समावेशी दुनिया के लिए खड़े हो सकें। आप क्या करेंगे?

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युवा आदिती साही रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे, लेकिन अहम और पावरफुल बदलाव लाना चाहती है, ताकि हम अधिक समावेशी बन सकें और अपने आसपास की विभिन्नता की सराहना कर सकें।

डीओन ने बच्चों से बात की और पाया कि शिक्षा 📘 बदलते समय की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन खेल 🏑, और बाहरी गतिविधियाँ 🏊 स्वस्थ दिमाग और शरीर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हैं।

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नेहा ने एक छोटी लड़की को नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित किया और उसे मूल्यवान महसूस कराया। वे कौन सी छोटी, जादुई चीजें या कार्य हैं जो आपके जीवन में बदलाव लाते हैं।

ज्यादात्तर LGBTQ लोग कार्यस्थल पर अपनी पहचान छिपाते हैं। समावेशन स्वीकार करने की दिशा में पहला कदम होता है। इसी बात ने समृद्धि को कार्यस्थल पर स्वीकार्यता का एहसास दिलाया।

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झारखंड की अनामिका कुमारी ने अपनी समावेशिता और साहस की कहानी को साझा किया।

महाराष्ट्र की जलवायु चैंपियन मेगाल ने बताया किया कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ उनकी लड़ाई में उन्हें कैसा महसूस हुआ💙

दुनिया भर में युवा बदलाव की अलख जगाने के लिए प्रयास कर रहे हैं! आइए आज और हर दिन, ग्रह को रहने योग्य बनाने के लिए उनके अथक प्रयासों के साथ खड़े रहें।
 

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गांधीनगर, गुजरात के दलजीत ने हाल ही में कॉलेज में अपने कस्टमर बिहेवियर स्टडी कोर्स में सीखा कि मेकअप का कोई जेंडर नहीं होता।😊

क्या आप पढ़ाई के लिए 5 किलोमीटर पैदल चले हैं और फिर भी आपकी आलोचना की जाती है? 

तमाम बाधाओं और आलोचनाओं के बावजूद, राजस्थान की माया अपने गांव से स्नातक की पढ़ाई करने वाली पहली महिला हैं। जब शिक्षा की बात आती है, तो लैंगिक असमानता से कैसे निपटा जा सकता है, इस पर अपने विचार साझा करें।

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जयन्ना को स्कूल और अन्य जगहों पर भेदभाव का अनुभव हुआ है। हर बच्चे के लिए भेदभाव और अभाव से मुक्त जीवन संभव है। यहां उनकी समावेशन की कहानी शुरू होती है।

इस तरह निशांत नाम का एक अजनबी बोरिस का सबसे अच्छा दोस्त बन गया और उसके जीवन में बदलाव लाया।

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यह कठिन हो सकता है जब आपकी बात नहीं सुनी जाती!!!

धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ, देखें कि झारखंड की लक्ष्मी झा ने कैसे सुनिश्चित किया कि उनकी आवाज़ सुनी जाए।

शाहिद अंसारी को यह साझा करते हुए देखें कि कैसे दयालुता के कुछ शब्दों और कार्यों ने उन्हें बेहतर महसूस करने में मदद की💙!

आइए एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए खुद को फिर से प्रतिबद्ध करें जहां हर बच्चा और युवा शामिल महसूस करे।
 

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अमिता के लिए कॉलेज की पढ़ाई की जगह से कहीं बढ़कर था। देखें कि अमिता को अपने कॉलेज में कैसे स्वीकार किया गया और शामिल किया गया।

गुजरात के ध्रुमी जैसे बच्चों के लिए दोस्त लाइफलाइन हैं। इसमें शामिल महसूस करने के लिए बस मुस्कुराहट 😊 और उसके प्यारे दोस्तों की ओर से दयालुता के छोटे-छोटे कार्यों की आवश्यकता थी।

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इस तरह वैदेही को अपने कॉलेज में वरिष्ठों और शिक्षकों के बीच शामिल और स्वीकार्य महसूस हुआ।

लड़कियों या लड़कों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। अरबाज की आवाज ऊंची और स्पष्ट है, "प्रत्येक बच्चे को सभी प्रकार के भेदभाव में शामिल होने और उसके खिलाफ सुरक्षा पाने का अधिकार है"।  

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"व्यवसाय चलाने और दुकान में बैठने के लिए बुद्धि और साहस की आवश्यकता होती है और इसका कोई जेंडर नहीं होता," ये सुनहरे शब्द हैं, जो संध्या की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाये। 

यह असम की संध्या और अपने हर काम में चैंपियन बनने के उसके दृढ़ संकल्प की कहानी है। वह एक ऐसी दुनिया का सपना देखती है जिसमें हम एकजुट हों और हर कोई शामिल महसूस करे😊।