अतीत से सबक लेकर भविष्य के लिए तैयार हो रही युवतियां
मासिक धर्म स्वास्थ्य के मुद्दे को मजबूती से उठा रही भारती
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बिहार, भारत- 11 वर्षीय निधि कुमारी को अभी तक माहवारी शुरू नहीं हुई है, लेकिन अगर आप उससे माहवारी के विषय में कुछ भी पुछेंगे तो वह बगैर किसी झिझक के, बिना पलक झपकाए जवाब देगी। बिहार के सीतामढ़ी जिले के कुसुमारी गांव निवासी निधि का माहवारी के लिए उसकी बड़ी बहन ने मानसिक रूप से तैयार किया है। निधि हंसते हुए बताती हैं कि, “मुझे मासिक धर्म के बारे में दीदी ने सब बता दिया है, अब जब भी मेरे जीवन में ये बदलाव आएगा मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं।” वहीं उसकी बड़ी बहन भी मुस्कुराते हुए विश्वास के साथ कहती हैं कि, “मुझे विश्वास है कि निधी को अब उन समस्याओं ने नहीं गुजरना पड़ेगा, जिनसे मैं रूबरू हुई थी।”
भारती गांव की बेटी होने के नाते अपने गांव-समुदाय में माहवारी स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए आवाज उठा रही हैं। वह ग्रामीण महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रबंधन के विषय में खुलकर समझाती हैं। इसके साथ ही स्वच्छता व स्वास्थ्य का महत्व, और माहवारी से जुड़े मिथकों पर भी वह महिलाओं से चर्चा करती हैं। भारती उन सभी मिथकों को तोड़ना चाहती हैं, जिनपर वह स्वयं भी अभी तक विश्वास करती थी। वह बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूह (एसएचसी) में वॉलिटियर हैं।
बेहतर भविष्य की नींव के लिए अतीत से सीख जरूरी:
भारती अपने दो कमरों के घर में बैठकर बताती हैं कि,“ काश, मुझे मासिक धर्म के बारे में वो सब पहले से पता होता जो अब पता चला है। उस वक्त मैं स्कूल में थी, मेरी सहेली ने मेरी स्कर्ट पर पीछे लगे लाल धब्बे की ओर इशारा करके मुझे बताया। मैं बहुत शर्मिंदा और डरी हुई थी, क्योंकि मुझे नहीं पता था माहवारी क्या होती है और ऐसे में क्या करना चाहिए? बाद में जब टीचर को पता चला तो उन्होंने मुझे घर जाने को कहा।” 20 वर्षीय भारती को जब मासिक धर्म शुरू हुए तो वह महज 13 साल की थी और उस वक्त वह स्कूल में थी।
भारती को लगा कि उसे कहीं चोट लगी है इसीलिए खून बह रहा है और उसने घर पहुंचकर अपने घावों को ढुंढना शुरू कर दिया। जब उसे अपने शरीर पर घाव नहीं मिले तो वह अपनी मां के पास गई और उन्हें अपनी समस्या बताई। भारती की मां ने उसे एक कपड़ा दिया और कहा कि, “वह किसी से इसका जिक्र ना करें।” बाद में भारती की मां ने उसे बताया कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हर महिला को होती है। इसमें हर माह शरीर से खून बहता है। साथ ही भारती की मां ने उसे "महीने के इन खास दिनों में अचार को न छूने की सख्त हिदायत दी और कहा कि अचार छू लिया, तो अचार को खराब हो जाएगा।"
यूनिसेफ की एक रिपोर्ट की माने तो 71% लड़कियों को माहवारी आने तक उसके बारे में कुछ नहीं पता होता। भारती भी उनमें से ही एक थी। इस विषय की महिलाओं की, समाज की चुप्पी मिथकों और भ्रांतियों को बढ़ावा देती है, जिसका नतीजा यह निकलता है कि युवा लड़कियां माहवारी के दिनों में उन खास दिनों को सहजता से नहीं ले पाती। और यही उन्हें मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बना देता है। कई बार लड़कियां स्कूल से अनुपस्थित रहने लगती हैं और कई मामलों में लड़कियां स्कूल ही छोड़ देती हैं।
बदलाव की शुरुआत:
सभी चुनौतियों के बावजूद भारती फिलहाल स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं, उसने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और वह लगातार आगे बढ़ती रही। SHG नेटवर्क के साथ जुड़ने से भारती में नये आत्मविश्वास का संचार हुआ और उसे दूसरों को भी जागरूक करने में मदद मिली। MHM के तीन दिवसीय प्रशिक्षण सेमिनार में भारती को अपने घर-परिवार और समाज में दूसरों के भविष्य की दिशा बदलने में सक्षम बनाया।
यूनिसेफ व जॉनसन एंड जॉनसन के सहयोग से सितंबर 2021 में सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए एनजीओ नव-अस्तित्व फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में हिस्सा लेकर भारती ने माहवारी स्वच्छता की बारीकियों को समझा जैसे मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ सेनेटरी पैड का इस्तेमाल कितना जरूरी है। उसने सीखा कि माहवारी के दौरान फैलाई गई भ्रांतियां जैसे बाल न धोना, अचार न छूना आदि बेबुनियाद हैं।
प्रशिक्षण शिविर में ट्रेनर से भारती इतना प्रभावित हुई कि उसने अपने फोन में वीडियो रिकॉर्ड किया। उसने वह वीडियो घर आकर अपनी बहन निधि को वह वीडियो दिखाया। भारती ने बताया कि, “वीडियो देखकर निधि ने मुझसे बहुत सारे सवाल पूछे और मैंने सहजता से सभी सवालों के जवाब देकर उसकी जिज्ञासा को शांत किया। क्योंकि, तब तक मैं भी समझ चुकी थी कि लड़कियों को अपने शरीर के प्रति जागरूक होना चाहिए, ताकि वह अपने जीवन और स्वास्थ्य पर नियंत्रण रख सकें।”
भारती अपने माहवारी के दिनों में सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं, जिसे बाजार जाकर खरीदने में उसे कोई संकोच महसूस नहीं होता। मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति चुप्पी तोड़ने के भारती के फैसले ने एक लहर का काम किया। युवा लड़कियों में भारती ने जागरूकता बढ़ाई और निधि जो अब पहले से ज्यादा जागरूक हो चुकी थी, उसने अपनी सभी दोस्तों में इस विषय पर चर्चा की। इन छोटी बच्चियों को किसी को अभी तक माहवारी शुरू नहीं हुई है, फिर भी यह सब इन खास दिनों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
निधि अपनी बहन भारती को चिढ़ाते हुए कहती है, “ट्रेनिंग लेने के बाद भारती ज्यादा बातूनी और आत्मविश्वासी हो गई है।”
बिहार के रीगा ब्लॉक के MHM में आयोजित हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में 167 सामुदायिक कार्यकर्ताओं और 25,000 महिलाओं ने हिस्सा लिया।
भारती के समझाने पर उसकी मां ने भी माहवारी के दौरान स्वच्छता की आदतें अपनाने की पहल की। निधि मुस्कुराते हुए कहती हैं कि, “अब मां मुझे अचार के मर्तबान का छूने से नहीं रोकती!”