विश्व जल दिवस

हर बच्चे के लिए,पानी का एक-एक बूंद संरक्षित करें ।

यूनिसेफ़
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के जमुनहाई गाँव में लोग यूनिसेफ द्वारा बनाए गए एक बंद सेनेटरी कुएं से पानी इकट्ठा करते हैं, जिसकी वजह से उनका कुछ घंटों से लेकर कुछ मिनटों तक का, उनके घर तक पानी लाने के सफर को आसान और कम करता है।
UNICEF/UN0388118/Vishwanathan
22 मार्च 2021

“साफ़ पीने का पानी उपलब्ध नहीं होने की वजह से मुझे अपना स्कूल छोड़ना पड़ता था। पड़ोस के गाँव से प्रतिदिन पानी लाने के लिए तीन से भी अधिक घंटे लगते थे। जिसकी वजह से मैं महीने में कुछ ही क्लासेस में पढ़ाई करने जा पाती थी।“

 रेश्मी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के जमुनहाई गाँव की रहने वाली है।

अपने घर जमुनहाई गाँव चित्रकूट, में पानी से भरे बाल्टी को पकड़े केशकली।
UNICEF/UN0388100/Vishwanathan
अपने घर जमुनहाई गाँव चित्रकूट, में पानी से भरे बाल्टी को पकड़े केशकली।

“कुछ साल पहले पानी बहुत मुश्किल से मिलता था। हालत बहुत गंभीर थी। हम दूर-दूर से पानी लाते थे।   रातभर जागकर, कतारों में घंटों खड़े रहकर दूर-दूर से गड्ढे/ कुआँ से पानी लाते थे।“

40 वर्षीय केशकली, जमुनहाई गाँव, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश।

जमुनहाई, चित्रकूट में एक कुएँ का एक सामान्य दृश्य।
UNICEF/UN0388184/Vishwanathan
जमुनहाई, चित्रकूट में एक कुएँ का एक सामान्य दृश्य।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट के जमुनहाई गाँव में यूनिसेफ़ के सहयोग से बंद सेनेटरी कुएं का निर्माण किया गया ।

जिसकी वजह से गाँव के लोगों का दूर दूर से पीने का पानी भर लाने की जद्दोजहद में कमी आई।

 गाँव के लोगों और बच्चों को अब पीने का साफ़ पानी आसानी से उपलब्ध हो गया।

 

40 वर्षीय केशकली चित्रकूट के जमुनहाई में अपने घर पर यूनिसेफ के सहयोग से बनाए गए बंद सेनेटरी कुएं से एकत्र किए गए पानी को बर्तनों में भरती हैं।
UNICEF/UN0388105/Vishwanathan
40 वर्षीय केशकली चित्रकूट के जमुनहाई में अपने घर पर यूनिसेफ द्वारा बनाए गए बंद सेनेटरी कुएं से एकत्र किए गए पानी को बर्तनों में भरती हैं।

“जब से कुआं बना है, हम सुरक्षित महसूस करते है क्यूंकि हमें साफ़ पीने का पानी हर वक्त मिल जाता है। अब लोगों के बीमार होने की संख्या में भी कमी आई है क्यूंकि पानी को सुरक्षित ढंग से ढक कर रखा गया है और मच्छरों से भी छुटकारा मिला है।“

40 वर्षीय केशकली, जमुनहाई गाँव, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश।

Reshmi, a class 10th student studies inside her house in Jamunhai, Chitrakoot.
UNICEF/UN0388087/Vishwanathan

“जब से कुआं बना है हमें अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए पानी लाने में आसानी हो गई। मैंने वापस स्कूल जाना शुरू कर दिया क्यूंकि पढ़ने के लिए समय मिलने लगा है और अब स्कूल छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती है।“  

कक्षा 10 वीं की छात्रा रेश्मी, चित्रकूट के जमुनहाई में अपने घर के अंदर पढ़ती हुई।

सभी को सुरक्षित साफ़ पानी उपलब्ध करने, पानी की कमी के संकट से जूझ रहे सभी अतिसंवेदनशील स्थानों पर बच्चों तक वैश्विक स्तर पर सहयोग  व समर्थन और संसाधनों को जुटाने के लिए यूनिसेफ़ कार्य कर रहा है। 

1.3 अरब लोग जिनमें 450 मिलियन बच्चे शामिल हैं-पानी की कमी के संकट से जूझ रहे अतिसंवेदनशीलता 
क्षेत्र में रह रहे हैं। 

आइए इस विश्व जल दिवस पर पानी के एक एक बूंद को संरक्षित करने का प्रण लें।

हर बच्चे के लिए, साफ़ पीने का पानी।