हर बच्चे के लिए हर अधिकार
अपने सभी अधिकारों की उपलब्धता के कारण बच्चे को अपनी योग्य पहचान और सम्मान के साथ अपने आप को अपनी इष्टतम क्षमता तक संपूर्णतः विकसित करने में सहायता मिलती है।
- English
- हिंदी
हर बच्चे के हर अधिकार के लिए
यूएनसीआरसी (बच्चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, १९८९) निर्धारित करता है कि १८ वर्ष से कम आयु के सभी व्यक्तियों को उन की नस्ल, रंग, लिंग, भाषा, धर्म, राय, मूल, धन, जन्म स्थिति या क्षमता की परवाह किए बिना दिए जाने वाले अधिकारों और स्वतंत्रताओं को बाल अधिकार कहा जाता है और इसी कारण सभी बच्चों के लिए बाल अधिकार हर जगह लागू होते हैं।
बाल अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हुए और समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, यानी एक अधिकार को दूसरे अधिकार की कीमत पर नहीं चुना जाना चाहिए।
अपने सभी अधिकारों तक पहुँच बच्चों को अपनी पहचान और गरिमा के साथ आगे बढ़ने तथा अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने में मदद करती है।
जब बच्चों के अधिकार सुरक्षित होते हैं, तब वे सीखते हैं,खेलते हैं, स्वस्थ और सुरक्षित रहते हैं और खुश रहते हुए अपने सपनों को पूरा कर पाते हैं।
सरकार और साझेदारों के साथ मिलकर यूनिसेफ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता है कि भारत में हर बच्चे को उसके सभी अधिकार मिलें। ताकि हर बच्चे को जीवन की अच्छी शुरुआत मिले, वह सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से आगे बढ़े और अपनी आवाज़ उठा सके।
हर बच्चे के लिए हर अधिकार: यूनिसेफ 2023 कैलेंडर डाउनलोड करें