जलवायु परिवर्तन चैंपियन बनें
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में युवा जलवायु चैंपियन प्रकृति, बीजू, तुली और फ्रिसबी के साथ जुड़ें
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जलवायु परिवर्तन वास्तविक है, हमें अभी ध्यान देने की ज़रूरत है!
जलवायु संकट यहाँ है और हर साल बदतर होता जा रहा है। दुनिया लगातार खतरनाक दर से गर्म होती जा रही है, जिससे लगभग हर बच्चे को लगातार और विनाशकारी जलवायु खतरों - वायु प्रदूषण, चक्रवात, बीमारी, बाढ़, हीटवेव और पानी की कमी का खतरा है।
जैसे-जैसे ये खतरे बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ज़्यादा बच्चों को नुकसान पहुँचेगा; ज़्यादा बच्चे मरेंगे। ये संकट सभी को समान रूप से प्रभावित नहीं करेंगे। बच्चों को वयस्कों की तुलना में अधिक कष्ट उठाना पड़ेगा, और सबसे अधिक बोझ सबसे गरीब समुदायों के लोगों पर पड़ेगा।
एक अरब से अधिक बच्चे गंभीर एवं विनाशकारी जलवायु खतरों के अत्यधिक उच्च जोखिम में हैं।
भारत में चक्रवात और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाएँ घरों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर देती हैं। उदाहरण के लिए, जुलाई 2020 के मध्य में, भारत में बाढ़ ने 10 राज्यों (यूनिसेफ, 2020) में 2.4 मिलियन बच्चों और युवाओं (और कुल 6 मिलियन से अधिक लोगों) को प्रभावित किया, जिससे हैजा या डायरिया जैसी बीमारियाँ हुईं, जो अभी भी दुनिया भर में बच्चों और युवाओं के लिए गंभीर बीमारी है।
अनियमित वर्षा पैटर्न, सूखा, जल संकट और बढ़ती जल मांग के कारण बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल की मात्रा कम हो रही है और या तो बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा हो रहा है या परिवारों को पलायन करना पड़ रहा है।
खराब वायु गुणवत्ता और प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और मृत्यु का कारण बनते हैं। बच्चे वयस्कों की तुलना में दोगुनी तेज़ी से सांस लेते हैं और वयस्कों की तुलना में वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए (खास तौर पर सबसे कमजोर बच्चों की) वित्तपोषण में पर्याप्त वृद्धि की आवश्यकता है। अनुकूलन के लिए वित्तपोषण बढ़ाया जाना चाहिए, खास तौर पर उन आवश्यक सामाजिक सेवाओं के लिए जिन पर बच्चे निर्भर हैं।
#MissionLiFE
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यूनिसेफ और YuWaah (जनरेशन अनलिमिटेड इंडिया) के साथ मिलकर इस पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़े खतरे के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नया जलवायु कार्रवाई अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का उद्देश्य एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार को मजबूत करेगा और आत्मनिर्भर होने में सक्षम बनाएगा और पिछले साल भारत के प्रधानमंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा शुरू किए गए मिशन लाइफ अभियान से जुड़ेगा।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में युवा जलवायु चैंपियन प्रकृति, बीजू, तुली और उनके मित्र फ्रिसबी के साथ जुड़ें।
- जलवायु परिवर्तन हमारे पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित कर रहा है, इस बारे में जागरूकता बढ़ाएं
- अपने मित्रों और परिवारजनों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के संदेश फैलाने के लिए प्रोत्साहित करें
- MeriLiFE ऐप के माध्यम से कार्रवाई करें।
हमारे अद्भुत जलवायु चैंपियंस से मिलिए
UNICEF
UNICEF
प्रकृति
'प्रकृति' का उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है, ताकि दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले छोटे-छोटे बदलावों के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके, जिससे प्लास्टिक का उपयोग कम हो सके और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण उपलब्ध हो सके।
UNICEF
बीजू
एक दस वर्षीय, चंचल और जिज्ञासु लड़का जो बाढ़-ग्रस्त गाँव से पलायन कर आया है। वह जलवायु परिवर्तन के बारे में अपने संदेश कागज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर बनाता है, उन्हें कागज़ के विमानों में बदल देता है, और लोगों का ध्यान जलवायु परिवर्तन की ओर आकर्षित करने के लिए उन्हें फेंकता है।
UNICEF
तुली
15 वर्षीय लड़की बिजू की एक करीबी दोस्त है, जो महानगर में रहती है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक व पर्यावरण के प्रति वास्तव में चिंतित है। तुली पर्यावरण संरक्षण के सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सोशल मीडिया की शक्ति में विश्वास करती है, और ऐसे समूह का प्रतिनिधित्व करती है जो जलवायु परिवर्तन के लिए जागरूक और कार्रवाई करने के लिए उत्सुक है।
UNICEF
फ्रिस्बी
एक मधुमक्खी और हर जीवित गैर-मानव प्राणी का एक रूपक प्रतिनिधित्व जो पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्रिसबी गलत व्यवहारों के प्रति सचेत करने के लिए लगातार भिनभिनाती रहती है और ग्रह को बचाने के लिए लोगों द्वारा किए गए सकारात्मक कार्यों की सराहना करती है।
कार्रवाई के बिना, जलवायु परिवर्तन बच्चों की असमानताओं को बढ़ाएगा, और आने वाली पीढ़ियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। गरीब परिवारों को झटकों से निपटने में मुश्किल होती है। सबसे कमजोर लोग पहले से ही अपने घर, स्वास्थ्य और शिक्षा खो रहे हैं। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन संकटों को आम बनाता है, उनसे उबरना मुश्किल होता जाता है।
भारत में जलवायु संकट से निपटने के लिए यूनिसेफ के प्रयास
कार्रवाई के लिए युवा लोग आवश्यक हैं। उनके पास सुरक्षित, अधिक टिकाऊ समाजों के लिए जुनून/प्रेरणा, महत्वपूर्ण कौशल, अनुभव और विचार हैं। वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ जी रहे होंगे और उन्हें अपने भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णयों में भाग लेने का अधिकार है।
यूनिसेफ वैश्विक और स्थानीय स्तर पर भागीदारों के साथ मिलकर काम करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में रह सकें। हमारी कार्रवाइयां चार दृष्टिकोणों के इर्द-गिर्द संरचित हैं, जिसमें बच्चों को जलवायु परिवर्तन रणनीतियों और प्रतिक्रिया योजनाओं का केंद्र बनाना और बच्चों को परिवर्तन के एजेंट के रूप में पहचानना शामिल है।
हमारा उद्देश्य बच्चों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय गिरावट के प्रभाव से बचाना और उत्सर्जन और प्रदूषण को कम करना है।
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