ODF+ (खुले में शौच से मुक्त प्लस) और स्वच्छता से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूनिसेफ इंडिया के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहां पाएं

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FAQs

प्रश्न 1: ODF+ क्या है? भारत में इसे कैसे लागू किया जा रहा है?

उत्तर: ODF का अर्थ हैओपन डिफेकेशन फ्री (खुले में शौच से मुक्त)। यानी कि कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न करे और सभी लोग शौचालय का उपयोग करें।

ODF+ (खुले में शौच से मुक्त प्लस) इसका अगला और व्यापक चरण है। इसमें केवल खुले में शौच को समाप्त करना ही नहीं, बल्कि ठोस और तरल कचरे के उचित प्रबंधन के साथ-साथ गांवों और समुदायों की साफ-सफाई भी सुनिश्चित की जाती है।

भारत सरकार ने वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत मिशन (SBM) की शुरुआत देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ की थी।

मिशन के पहले चरण (2014–2019) में शौचालय निर्माण, उनके नियमित उपयोग और लोगों में व्यवहार परिवर्तन पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें जनभागीदारी को अभियान की सबसे बड़ी ताकत के रूप में अपनाया।

वर्ष 2020 में शुरू हुए दूसरे चरण का उद्देश्य शौचालयों के उपयोग को बनाए रखने के साथ-साथ ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करना और भारत को (खुले में शौचसे मुक्त राष्ट्र) का लक्ष्य हासिल करना है।

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत अब तक ग्रामीण भारत के 18 करोड़ से अधिक परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है।

प्रश्न 2: ODF+ के क्या लाभ हैं?

उत्तर: ODF+ का असर केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

  • स्वच्छ और बेहतर पर्यावरण: कचरे के बेहतर प्रबंधन और साफ-सफाई से गांवों और बस्तियों का वातावरण अधिक स्वच्छ होता है। साथ ही खुले में शौच के कारण भूजल प्रदूषण की समस्या भी कम होती है।
  • बेहतर स्वास्थ्य: खुले में शौच खत्म होने से डायरिया और मल के जरिए फैलने वाली अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है। इससे लोगों के बीमार पड़ने और मृत्यु के मामलों में भी कमी आती है।
  • महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान: घर में शौचालय होने से महिलाओं और किशोरियों को अधिक सुरक्षा, सुविधा और गोपनीयता मिलती है। उन्हें अंधेरे या सुनसान स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उत्पीड़न और असुरक्षा का जोखिम कम होता है। इससे उनका आत्मसम्मान भी बढ़ता है।
  • आर्थिक लाभ: यूनिसेफ के एक अध्ययन के अनुसार, ODF क्षेत्रों में रहने वाले परिवार इलाज पर होने वाले खर्च, समय की बचत और अन्य लाभों के कारण सालाना लगभग 50,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं।

इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित अध्ययनों और शोध रिपोर्टों को देखें:

  1. स्वच्छ भारत मिशन का राष्ट्रीय आर्थिक प्रभाव मूल्यांकनhttps://www.unicef.org/india/media/8801/file/UNICEF.pdf

    इस अध्ययन में मिशन के कारण परिवारों और समुदायों को हुए आर्थिक लाभों का विश्लेषण किया गया है।

  2. ग्रामीण भारत में शौचालयों की उपलब्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा तथा आत्मसम्मान पर उसका प्रभावSafety-security-and-dignity-of-women.pdf

    यह रिपोर्ट बताती है कि घर में शौचालय होने से महिलाओं और किशोरियों के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव आते हैं।

  3. स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण और भारत में शिशु मृत्यु दर पर उसका प्रभावhttps://www.nature.com/articles/s41598-024-71268-8

    यह शोध सुरक्षित स्वच्छता और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के बीच संबंध को रेखांकित करता है।

प्रश्न 3: बच्चों पर स्वच्छता का क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: खराब स्वच्छता का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों, विशेषकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर पड़ता है। सुरक्षित स्वच्छता बच्चों के जीवन, स्वास्थ्य, विकास और शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

  • बच्चों के जीवन की सुरक्षा: अध्ययनों से पता चला है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण से शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। खुले में शौच खत्म होने से बच्चों का हानिकारक रोगाणुओं के संपर्क में आना कम हो जाता है।
  • डायरिया जैसी बीमारियों में कमी: भारत में डायरिया बच्चों में बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। ODF+ समुदायों में जल स्रोतों और आसपास के वातावरण के कम प्रदूषित होने से बच्चों में डायरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।
  • कुपोषण और बौनापन रोकने में मदद: बार-बार संक्रमण होने से बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है, जिससे कुपोषण और शारीरिक विकास में रुकावट आ सकती है। सुरक्षित स्वच्छता इस समस्या को कम करने में मदद करती है और बच्चों के बेहतर विकास को बढ़ावा देती है।
  • स्कूल में नियमित उपस्थिति: स्कूलों में सुरक्षित और अलग शौचालय उपलब्ध होने से बच्चों की उपस्थिति बढ़ती है। विशेष रूप से किशोरियों के लिए मासिक धर्म के अनुकूल सुविधाएं उन्हें पढ़ाई जारी रखने में मदद करती हैं।
  • सुरक्षा और संरक्षण: खुले में शौच के लिए जाने वाले बच्चों, खासकर लड़कियों, को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। घर और समुदाय में शौचालय होने से ये खतरे कम होते हैं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनता है।

यूनिसेफ स्वच्छ भारत मिशन के तहत बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को केंद्र में रखते हुए ODF+ गतिविधियों के विस्तार, जागरूकता और सुरक्षित स्वच्छता के प्रभावों पर साक्ष्य तैयार करने में सहयोग कर रहा है।