हर बच्चे को जीवित रहने का अधिकार है

रिशिता का वज़न जन्म के समय 650 ग्राम था और वह जीवित बच गई |

गौरी सुन्दरराजन
 खेलती हुई रिशिता
UNICEF/UNI310792/Altaf Ahmad
05 जनवरी 2021

2020 का वर्ष सबसे चुनौतीपूर्ण वर्षों में से एक वर्ष के रूप में हमारी यादों में रहेगा | कोविड - 19 के खिलाफ लड़ाई और लम्बी महामारी ने सबको सताया, लेकिन कुछ लोगों पर इसका अधिक असर हुआ और विशेष रूप से सभी जगह बच्चों पर इसका गहरा असर हुआ | 

कोविड - 19 बाल-अधिकारों पर भी एक संकट था और है | लगभग 29 करोड़ बच्चों की पढ़ाई छूट गई, लाखों का टीकाकरण नहीं हो सका और जाने कितने अपने घरों में असुरक्षित महसूस करते रहे |

लेकिन जीने की प्रेरणा और उम्मीद की किरण हमेशा रहती है |

गत मार्च 2020 में यूनिसेफ इंडिया की टीम रिशिता से मिली | अपने जन्म के समय रिशिता भारत की सबसे छोटी बच्ची थी, जिसका वज़न जन्म के समय केवल 650 ग्राम था | उसके माता-पिता को आज भी याद है,जब वो उसे एक रुमाल में लपेटकर अस्पताल लेकर आये थे | आज रिशिता पाँच वर्ष की है, स्वस्थ है और कोविड - 19 के पहले तक वह पढ़ने के लिए आंगनवाड़ी केंद्र जाती थी | 

 खेलती हुई रिशिता
UNICEF/UNI310857/Altaf Ahmad

निर्धारित समय से 12 सप्ताह पहले जन्मी रिशिता को कुछ अस्पतालों ने भर्ती करने से मनाकर दिया था क्योंकि कोई नहीं जानता था कि वो बच पायेगी | अंत में जब उसे एसएनसीयू (विशेष नवजात देखभाल इकाई) की सुविधा वाले एक अस्पताल में भर्ती किया गया, तो भी डॉक्टर को उसके बचने की बहुत उम्मीद नहीं थी क्योंकि इन इकाइयों में भर्ती के लिए निर्धारित 1200 ग्राम से उसका वज़न बहुत कम था | फिर भी डॉक्टरों ने उम्मीद नहीं छोड़ी |  

विशेष प्रयासों जैसे कंगारू देखभाल, दाता दूध, वाटर बेड और यहाँ तक की ध्वनि पद्धति से रिशिता ने अपनी जिजीविषा के संकेत देने शुरू कर दिए | 156 दिनों के बाद 2.3 किग्रा की रिशिता को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई | आज रिशिता जीवन से भरपूर, स्वस्थ और एक चंचल बड़ी बहन है |

महामारी के दौरान भी भारत के तेलंगाना में नालगोंडा जिला अस्पताल के डॉ.यादैया और उनकी टीम क्रियाशील रही और ये स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, जिनके साथ यूनिसेफ की गौरवपूर्ण सहभागिता है, के द्वारा प्रदान किये जा रहे नवजात देखभाल का अभिन्न अंग था |

आज जब हम नए वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, यूनिसेफ इंडिया में हम प्रत्येक बच्चे के जीवित रहने और आगे बढ़ने में मदद करते रहेंगे | यूनिसेफ के साथ जुड़िये और प्रत्येक बच्चे के जीवित रहने और आगे बढ़ने में सहयोग कीजिये।

 

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UNICEF/India/Sundararajan