हमारे बच्चों के भविष्य की पुनर्कल्पना के लिए टेलेथोन

कोविड - 19 संकट से प्रभावित अधिक संवेदनशील बच्चों की रक्षा करने में हमारी मदद करें।

यूनिसेफ़ इंडिया
बिस्तर पर बैठकर किताबे पढ़ती दो लड़कियाँ
UNICEF/UNI355738/Panjwani
22 नवंबर 2020

कोविड - 19 संकट से प्रभावित अधिक संवेदनशील बच्चों की रक्षा करने में हमारी मदद करें। तत्काल फंडिंग और प्रमुख जीवन रक्षक हस्तक्षेप जैसे स्वास्थ्य देखभाल, पोषण एवं टीकाकरण के बिना भारत में प्रतिदिन 1600 अतिरिक्त बच्चों की मृत्यु हो सकती है क्योंकि कोविड - 19 महामारी स्वास्थ्य प्रणाली को लगातार कमज़ोर कर रहा है और सामान्य गतिविधियों में बाधा पहुंचा रहा है |

एन डी टी वी और यूनिसेफ के विशेष अभियान ‘हमारे बच्चों के भविष्य की पुनर्कल्पना करें’ से जुड़ें | इस टेलेथोन का सजीव प्रसारण एन डी टी वी पर रविवार 22 नवम्बर को सायं 7 से 9 बजे तक देखें|

हमारे अभियान के पेज पर जाएँ और कोविड 19 से प्रभावित लोगों की मदद के लिए यूनिसेफ के जीवन रक्षक कार्यों में मदद करें| 

कोविड – 19 मात्र एक स्वास्थ्य संकट नहीं है | यह बाल-अधिकारों पर संकट है और बच्चों के जीवन को हर संभव तरीकों से प्रभावित कर रहा है | लॉकडाउन समाप्त होने से चीजें बेहतर होंगीं लेकिन एक लम्बे समय तक पूर्व की तरह सामान्य नहीं हो पाएंगीं – और इस दौरान जीवन, शिक्षा और भविष्य को नुकसान पहुंचेगा |  

इस महामारी का सर्वाधिक दीर्घकालीन प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा | हमारे बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक सुरक्षा को सर्वाधिक प्रभावित करते हुए कोविड – 19 ने बुरी स्थिति को केवल और बदतर किया है | बिना हमारे – विचारों, संसाधनों और दिल से - हस्तक्षेप और निवेश के, इन बच्चों का कोई भविष्य नहीं है |

इस प्रलयंकारी वैश्विक संकट के भुलाए हुए पीड़ितों को सही भविष्य देना हमारे हाथों में है | हमें कल की पुनर्कल्पना करनी होगी, हमें हमारे बच्चों के भविष्य की पुनर्कल्पना करनी होगी | 

इस महामारी ने दिखा दिया कि हम सभी को अपनी भूमिका निभानी है | भारत सहित पूरे विश्व में बच्चों को अनेकों संकटों का सामना करना पड़ा है | इस महामारी ने दिखा दिया कि प्रत्येक बच्चे के लिए खतरा है लेकिन साथ ही इसने ये भी दिखा दिया कि हम साथ आ कर क्या क्या कर सकते हैं |

 

यूनिसेफ इंडिया और एन डी टी वी
हर बच्चे के बेहतर भविष्य की पुनर्कल्पना के लिए  एन डी टी वी के साथ हमारे विशेष अभियान से जुड़ें |

* कुछ महीनों पूर्व लांसेंट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित जॉन होपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के एक अध्ययन ने निम्न एवं माध्यम आय वाले देशों में बच्चों की मृत्यु एवं उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड – 19 महामारी के अप्रत्यक्ष प्रभावों के शुरुआती अनुमानों का एक मॉडल प्रस्तुत किया है | इस अध्ययन के अनुसार सेवाओं में बाधा की सर्वाधिक बुरी परिस्थितियों में कोविड – 19 से सम्बंधित द्वितीयक प्रभावों से प्रतिदिन 6000 बच्चों की मृत्यु हो सकती है | इनमें 1600 से अधिक बच्चे भारत में हैं |