बच्चों के लिए कोविड - 19 के बाद की दुनिया की परिकल्पना

युवा नेतृत्व का राष्ट्रीय बाल दिवस पर ब्लॉग

परिधि पुरी
बच्चों ने यूनिसेफ प्रतिनिधि के कार्यालय की ज़िम्मेदारी संभाली
UNICEF/UN0146601/Vishwanathan
20 नवंबर 2020

ये कहना कम होगा कि कोविड - 19 ने एक अनियंत्रित अव्यवस्था को सब ओर फैला दिया है और बाल अधिकारों, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कल्याण के मौजूदा तंत्र के अस्तित्व के लिए खतरा उत्पन्न किया है | बच्चों का भविष्य खतरे में है, विशेष रूप से उन समुदाय के लिए जो असमान समाज में हाशिये पर हैं |   बच्चों में, जो कि पूरी दुनिया के शरणार्थियों की आधी संख्या हैं, कोविड - १९ का झटका विशेषतः बहुत भयानक है | इन गंभीर परिस्थितियों में जब हमारे जीवन में व्याप्त अनिश्चितताएं बहुत कठिन हो गई हों, हमें अवश्य ही एक समान, समानतापूर्ण और पक्षपात रहित दुनिया हेतु अपने दृष्टिकोण की पुनर्कल्पना करना चाहिए |

विश्व बाल दिवस 2020 पर एक युवा नेतृत्व के रूप में बिताए गए पलों के संस्मरण को साझा करना मेरे लिए ज़बरदस्त विशेषाधिकार और सम्मान की बात है | यूनिसेफ के साथ मेरा जुड़ाव हमेशा आँखें खोलने वाला, शक्ति देने वाला और शिक्षाप्रद रहा है | एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में बाल अधिकारों पर फ्रांस की प्रथम महिला सुश्री ब्रिजिट मैक्रॉन से भारत भ्रमण के दौरान बात करने से लेकर यूनिसेफ के डिजिटल कार्निवल में वक्ता बनने, विश्व बाल दिवस पर छात्र प्रतिनिधि बनने तक - मुझे एक अधिक समान विश्व की कल्पना करने वाले छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के अनेकों मौके मिले |

विश्व बाल दिवस, 20 नवंबर 2017 को इंडियन स्कूल की अवंतिका चोढा के साथ मुझे जीवन का सबसे बड़ा मौका मिला जब हमने पूरी दुनिया में महत्वपूर्ण लोगों के कार्यालयों में युवाओं को सुने जाने के भाग के रूप में संयुक्त राष्ट्र के बाल ज़िम्मेदारी अभियान (किड्स टेकओवर इनिशिएटिव) के अंतर्गत यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक़ का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला | युवाओं के सन्दर्भ में राष्ट्र को नुकसान पहुँचाने वाले मुद्दों पर हमने चर्चा किया | यूनिसेफ इंडिया के प्रमुखों के साथ हमारे सत्र में मैंने और अवंतिका ने शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों में युवाओं को जोड़ने के मुद्दे उठाए | पोषण की कमी, शिक्षा में रुकावट और लैंगिक असमानता पर लम्बी चर्चाओं में आवाज़ उठाई गई और युवाओं को साथ लेकर इन मुद्दों के समाधान के लिए निम्न सुझाव दिए गए |

चर्चाओं के दौरान मैंने और अवंतिका ने महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण सम्बन्धी विषयों पर चर्चा की और ये स्पष्ट किया कि किस प्रकार सामाजिक कुरीतियों के चलते गरीब समुदायों में लैंगिक असमानता प्रबल रूप ले लेती है| प्राथमिक कक्षाओं के बाद बड़ी संख्या में लड़कियों के स्कूल छोड़ने पर भी ज़ोर दिया गया क्योंकि इसके कारण महिलाएं उचित शिक्षा से वंचित रह जाती हैं जो कि एक सम्पूर्ण जीवन की मूलभूत ज़रुरत है | मेरे और अवंतिका के प्रयास से हमारे द्वारा दिए गए सुझाव पर अमल करने के वादे और उम्मीद मिली, जिससे छोटी लड़कियों के लिए एक बेहतर भविष्य की कल्पना की जा सकती है | ऐसी उत्साहजनक बातचीत संसदीय बाल समिति में भी जारी रही जिसमें अन्य लोगों के साथ श्रीमती वंदना चवान, श्री वाई. वी. सुब्बा रेड्डी और डेरेक ओ ब्रायन आदि सांसदों ने कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र से आई लड़कियों की शिकायतें सुनीं |

इसी प्रकार, मैं विश्व बाल दिवस 2018 के एक समारोह का हिस्सा थी, जिसमे मैंने दूरदर्शन पर एक पैनल डिस्कशन का सञ्चालन किया था जिसमें शिक्षाविद, छात्र नेता और अधिवक्ता गण शामिल हुए थे | इस दिन का समापन यूनिसेफ के गुडविल एम्बेसडर सचिन तेंदुलकर के इंटरव्यू के बड़े मौके के साथ हुआ जिन्होंने हमारे साथ समय बिताया और बाल-अधिकारों और किशोरों के कल्याण के उपायों पर चर्चा की |

2017 में प्रथम विश्व बाल दिवस, बाल ज़िम्मेदारी वहन (किड्स टेक ओवर) के लिए नए बाल-ज़िम्मेदारी प्रतिनिधियों का स्वागत करती यूनिसेफ प्रतिनिधि सुश्री यास्मीन अली हक़
UNICEF/UN0146609/Vishwanathan
यूनिसेफ प्रतिनिधि सुश्री यास्मीन अली हक़ एक दिन के नए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए

हमारी दुनिया में सदियों से चली आ रही पीड़ादायक असमानता को इस महामारी ने और बढ़ा दिया - साथ ही संसाधनों के असमान वितरण के कारण छात्रों को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिजिटल विभेद और संस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है | यहाँ से आगे निकलने के लिए, इन प्रणालीगत बाधाओं को दूर करने के लिए छात्रों, युवाओं और बच्चों के साथ नागरिक के रूप में जुड़ाव बहुत महत्वपूर्ण है |

घबराहट सम्बन्धी बीमारियों, अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं की समस्त स्पेक्ट्रम की बढ़ती घटनाओं के बीच बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य खतरे में है – ये सब महामारी से घिरी दुनिया में घरों में बंद रहने, सीमित सामाजिक व्यवहार, बाहर की गतिविधियों में कमी और असहायता के सम्मिलित दबाव से बढ़ गया है | बच्चों को मदद को व्यवस्थित करने के महत्त्व को कम करके नहीं आँका जा सकता – विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जो गरीब और हाशिये पर रहने वाले समुदायों से हैं| खतरे के प्रति संवेदनशील युवाओं के लिए स्कूल आधारित मानसिक स्वास्थ्य न्याय पर एक पायलट कार्यक्रम का निर्माण, समय की आवश्यकता है | प्रमुख बातों में शिक्षा व्यवस्था में शामिल सहभागियों में मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों को बढ़ाने और सततता को सुनिश्चित करने के लिए स्कूल नेतृत्व और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए क्षमता वर्धन में निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए |

बहुत लोगों के पास डिजिटल शिक्षा के साधन उपलब्ध नहीं हैं जिसके कारण ऑनलाइन शिक्षा के प्रसार में बाधा आती है | यह आवश्यक है कि वैश्विक स्तर पर शिक्षा नीतियों में पढ़ाने, परीक्षा और प्रशिक्षण के वैकल्पिक तरीकों को शामिल किया जाए - ऐसी व्यवस्था जो हर प्रकार से समावेशी हो |

हमारी कोविड - 19 के बाद की पुनुरुत्थान रणनीति, समावेशी वार्ता और निर्णय प्रक्रिया सहित सभी क्षेत्रों के सतत विकास को सुनिश्चित करने वाले वृद्धि कर्व के समान होनी चाहिए | महत्वपूर्ण गति से इतिहास लिखा जा रहा है और हमारे सामने ऐसे विकल्प और निर्णय हैं जो हमारे ग्रह का भविष्य निर्धारित करेंगे |

परिधि पुरी अभी दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज में अर्थशास्त्र स्नातक की छात्रा हैं | वो डी यू बीट की कॉपी एडिटर हैं और मानसिक स्वास्थ्य, सतत विकास लक्ष्य और बाल अधिकारों के प्रति उत्साहित हैं |