दूसरों की मदद करने के लिए युवतियों ने बाधाओं को पार किया

ओडिशा की दो चैंपियन जो COVID-19 के खिलाफ लड़ाई के साथ जुड़ीं

Radhika Srivastava and Neha Naidu
Itishree working in a BPO.
UNICEF India
30 जून 2020

ओडिशा राज्य सम्पूर्ण लॉकडाउन में प्रवेश करने के साथ जब उनके आस-पास का जीवन ठहर गया, मिनी और इतिश्री आगे बढ़ीं और COVID-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में शामिल हुईं।

19 साल पुरानी दो दोस्तों ने ओडिशा सरकार द्वारा होम क्वारंटाइन में रह रहे लोगों को ट्रैक करने के लिए स्थापित एक कॉल सेंटर में काम करने का मौका नहीं गवाया।

“मैं घर पर असहाय होकर नहीं बैठना चाहती थी और अपने राज्य के प्रति योगदान देने का ये एक अच्छा मौका था,” इतिश्री ने कहा।

कॉल सेंटर उन लोगों को ट्रैक करने के लिए बनाया गया था जिन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है और जो COVID-19 से संक्रमित होने के जोखिम के अधीन हैं। हर रोज दोनों लड़कियां क्वारंटाइन में रह रहे लोगों को कॉल करती हैं और उनके लोकेशन और सेहत की खबर लेती हैं।

“हर दिन मैं लगभग 200 लोगों को कॉल करती हूँ। हम उनसे पूछते हैं कि क्या उन्हें COVID-19 के कोई लक्षण नज़र आ रहे हैं, हम उन्हें आश्वासन भी देते हैं और क्वारंटाइन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी याद दिलाते हैं।”

“कभी-कभी लोग मुझसे बहुत ही रुखा व्यवहार करते हैं और मैं उदास हो जाती हूँ। लेकिन मैं धीरज नहीं खोती और उन्हें कहती हूँ कि उनकी भलाई इसी में है कि वे सख्त क्वारंटाइन में रहें,” इतिश्री ने कहा।

ये काम आसान नहीं है। अक्सर लोग नाराज़ और परेशान हो जाते हैं, लेकिन दोनों युवती काम करने के अवसर से प्रेरित होती हैं।

“कॉल सेंटर में काम करके मुझे गर्व महसूस होता है। मैं नहीं जानती थी कि मैं बड़ी होकर क्या बनना चाहती हूँ, लेकिन मैंने हमेशा से ही एक बड़े ऑफिस में काम करने का सपना देखा है और अब ऐसा करके मैं खुश हूँ,” इतिश्री ने कहा।

Mini working in a BPO.
UNICEF India

मिनी और इतिश्री ने एक कष्टमय बचपन देखा था जिस दौरान वे अपने परिवारों के बिना ही बड़ी होने पर मजबूर हुईं।

उन्होंने कई साल बाल देखभाल संस्थान में बिताए जहाँ से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

“चीजें आसान नहीं थीं। जब तक मैं सेंटर में रही तब तक मेरे माता-पिता, जो अलग हो चुके थे, मुझे मिलने कभी नहीं आए। लेकिन मुझे दूसरे बच्चों के साथ रहने में मज़ा आता था,” मिनी ने कहा।

संस्थान से बाहर के जीवन के लिए तैयार बनने के लिए, दोनों लड़कियों ने अपने ज्ञान, कौशल के निर्माण और एक स्वतंत्र जीवन जीने के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए यूथ काउंसिल फॉर डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के सहयोग से यूनिसेफ द्वारा चलाई गई ‘आफ्टरकेयर’ पहल का लाभ उठाया। इन पहलों के तहत मिनी को आतिथ्य प्रशिक्षण प्राप्त करने में सहायता मिली और इतिश्री ने ग्राफिक डिजाइन का कोर्स किया।

“दोनों लड़कियों ने प्रदान की गई सहायता का सर्वोत्तम उपयोग किया है। जबकि हमने उन्हें शिक्षा पाने में मदद की, सुरक्षित रखा और उन्हें स्वतंत्र बनने में मदद की, लड़कियों ने बहुत लचीलापन दिखाया है और अपनी कठिनाइयों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत की है,” जिला बाल संरक्षण अधिकारी, खोरधा, बनिश्री पट्टनायक ने कहा।

आगे आने वाली चुनौतियों के बावजूद, मिनी और इतिश्री दोनों अन्य बच्चों की मदद करने के लिए उत्सुक हैं, जिनके पास उनकी तरह ही एक स्थिर बचपन नहीं है और जो संस्थानों में रहते हैं। वास्तव में, इतिश्री उन्हें कुछ सलाह देना चाहती हैं:

‘मैं चाहती हूं कि ऐसे सभी बच्चे यह जान लें कि यदि हमारे साथ अच्छा हो सकता है, तो उनके साथ भी अच्छा हो सकता है। उन्हें कड़ी मेहनत करने की जरूरत है और अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उन्हें संरक्षित रखा जाए, प्रोत्साहित किया जाए और पढ़ने का मौका दिया जाए’।

“जब बच्चे उस संस्थान से बाहर निकलते हैं जहाँ वे बड़े हुए हैं, तब वे अत्यंत संवेदनशील होते हैं और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए मदद की जरूरत होती है। मैं सरकार से आग्रह करना चाहूंगी कि सरकार ऐसे बच्चों का नामांकन किसी विश्वविद्यालय में करवाना और डिग्री की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें। इससे उन्हें अपने जीवन की एक अच्छी शुरुआत करने में मदद मिलेगी,” इतिश्री ने कहा।

यूनिसेफ ओडिशा फील्ड ऑफिस राज्य सरकार की भागीदारी में राज्य में चल रही बाल संरक्षण कार्यक्रमों में समर्थन करता है और सुनिश्चित करता है कि राज्य का हर बच्चा सुरक्षित हो, और टीम बच्चों की बात सुनने और उनकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती है।

‘मिनी और इतिश्री हम सभी के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्होंने हमें दिखाया है कि बच्चों का उन संस्थानों से निकलने के बाद जहाँ वे बड़े हुए हैं, उनके कुशल आफ्टरकेयर सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या काम किए गए हैं और क्या अधिक करने की जरूरत है। हमें इन दोनों पर बहुत गर्व है,” फील्ड ऑफिस, ओडिशा की चीफ मोनिका नीलसेन ने कहा।

आफ्टरकेयर उन युवाओं के लिए एक सहायता कार्यक्रम है, जो जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम, 2015 के अनुसार 18 साल के होने पर संस्थागत देखभाल या किसी अन्य देखभाल व्यवस्थाओं से बाहर निकलते हैं। ओडिशा सरकार के सहयोग से और यूनिसेफ के समर्थन के साथ, राज्य के बौध, बोलांगीर और खोरधा जिलों में आफ्टरकेयर कार्यक्रम स्थापित किए गए हैं। इस सहयोग ने राज्य भर में आफ्टरकेयर कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए कार्य संचालन पहले से ही शुरू कर दिया है।