जलवायु कार्रवाई पर मांग पत्र प्रस्तुत करते बच्चे

विश्व बाल दिवस पर पूरे भारत के बच्चों ने देश के बड़े नेताओं को एक आठ सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत किया

गौरी सुन्दरराजन
एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान सांसदों से वार्ता करते बच्चे
यूनिसेफ़ इंडिया
26 नवंबर 2020

विश्व बाल दिवस के अवसर पर एक वर्चुअल कांफ्रेंस के दौरान बच्चों ने मुख्य अतिथि भारत के माननीय उप-राष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू, साथ में माननीय मंत्री महिला एवं बाल विकास श्रीमती स्मृति ईरानी और 30 सांसदों को जलवायु कार्रवाई पर मांग पत्र प्रस्तुत किया |

सिविल सोसाइटी गठबंधन नाइन इज़ माइन, एन जी ओ प्रत्येक, यू-रिपोर्ट और यूनिसेफ इंडियाके सहयोग से आयोजित बच्चों की वार्ता के भाग के रूप में पूरे भारत के बच्चों ने जलवायु परिवर्तन के उनके ऊपर पड़ने वाले प्रभावों को साझा किया | मांग पत्र तैयार करने में लगभग 7000 बच्चों ने भाग लिया |

राष्ट्रीय समावेशी बाल संसद की उपाध्यक्ष, सत्रह वर्षीया मनीषा राम ने कहा, "जलवायु मांग पत्र कोविड - 19 के दौरान हमारी कड़ी मेहनत का प्रतीक है | हम वोटर भले न हों, पर हम ये मानते हैं कि हमारी आवाज़ वयस्कों से अधिक प्रभावशाली है"|

जलवायु कार्रवाई पर मांग पत्र में निम्नलिखित आवश्यकताओं पर ज़ोर दिया गया है :

हरित सार्वजनिक परिवहन विकल्प

स्वच्छ पर्यावरण

एकल-प्रयोग प्लास्टिक पर रोक

वनीकरण को प्राथमिकता

स्कूलों और समुदायों में और अधिक जागरूकता पैदा करना

जलवायु परिवर्तन और जन-स्वास्थ्य के सम्बन्ध पर शोध

स्थानीय सरकारी निकायों द्वारा पर्यावरण सम्बन्धी नियमों का सख्ती से अनुपालन

डिजिटल विभेद को कम करना और एक जलवायु  अभियान का निर्माण करना

भारत भर के बच्चे

अपने शुरुआती सम्बोधन में माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने सभी से भारत के बच्चों के सामने आ रही चुनौतियों पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया |

"भारत और पूरी दुनिया आज अपने को एक निर्णायक मोड़ पर पाती है - जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे बच्चे बड़े खतरे का सामना कर रहे है और नीति निर्माता, नेता, समाज के अग्रणी लोगों, अभिभावकों और  दादा-दादी या नाना-नानी के रूप में हम लोग ही उन्हें इससे बाहर निकल सकते हैं | हम अपनी उदासीनता से उनकी ज़िन्दगी खतरे में नहीं डाल सकते |"

इसके पश्चात् उन्होंने बच्चों को अपना परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया |

“बाल - अधिकारों को प्रमुख राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन रणनीतियों, नीतियों और योजना दस्तावेजों में शामिल होना चाहिए | जलवायु परिवर्तन पर हमारे रिस्पांस को बाल-केंद्रित होना चाहिए जो ऐसे प्लेटफार्म के माध्यम से किया जा सकता है | ”

श्री एम वेंकैया नायडू, भारत के माननीय उप-राष्ट्रपति

राष्ट्रीय समावेशी बाल - संसद में उपराष्ट्रपति के समकक्ष मनीषा राम ने बाल एवं वयस्क सांसदों को बताया कि जलवायु कार्रवाई सीमित राजनीति से बढ़कर होना चाहिए और जलवायु आपातकाल की घोषणा करने की मांग की |

उन्होंने प्रतिभागियों से अनुरोध किया, "हम जानते हैं कि ये संभव है | हम सबने देखा कि किस प्रकार कोविड - 19 से निर्णायक रूप से निबटा गया | हमारे पास अपने अपने ग्रह, अपने घर और अपनी धरती माँ को बचाने के लिए केवल कुछ वर्ष ही बचे हैं |"

पूरे भारत के बच्चों ने अपनी कहानी सुनाते हुए ये बताया कि किस प्रकार जलवायु परिवर्तन ने उन्हें प्रभावित किया है और उचित कार्रवाई की मांग की |

तमिल नाडु के कोटागिरी से बाल संसद की बारह वर्षीय सदस्य तमिल तुलसी ने बताया की किस प्रकार जलवायु परिवर्तन के कारण उसके परिवार का घर छिन गया और उसने भविष्य में ऐसा होने से रोकने के लिए कार्रवाई की मांग की |

उसने कहा, "मेरा परिवार के शेड नुमा घर में रहता था हो भारी बारिश और भू-क्षरण के कारण नष्ट हो गया | मैं वनीकरण को प्राथमिकता दिए जाने और उसके लिए फंडिंग प्रदान करने की मांग करती हूँ |"

त्रिपुरा के 16 वर्षीय बिनोद देब बर्मा ने प्रतीक भाषा (साइन लैंग्वेज) के माध्यम से बताया कि किस प्रकार 2017 में एक स्कूल के दिन आया भूकंप उसके और उसके दोस्तों के लिए भयावह अनुभव बन गया | उन लोगों को बाद में राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (एन डी आर एफ) ने आपदा जागरूकता पर प्रशिक्षण दिया |

बिनोद ने कहा, "सभी स्कूलों में आपदा प्रबंधन के लिए एक आपातकालीन योजना होनी चाहिए और कक्षाओं में प्रत्येक बच्चे के लिए इमरजेंसी लाइट और साईरन होने चाहिए | किसी प्राकृतिक आपदा के समय दिव्यांग बच्चों / लोगों को निकालने में प्राथमिकता देनी चाहिए |" 

"मैं समुदायों और स्कूलों में और अधिक जागरूकता की मांग करता हूँ | मैं जलवायु आंदोलन के निर्माण और शिक्षा के लिए सामान अवसर सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल विभेद समाप्त करने की भी मांग करता हूँ |"

त्रिपुरा से 16 वर्षीय बिनोद देब बर्मा

वर्चुअल बाल जलवायु संसद में बोलते हुए, माननीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा और पर्यावरण की दृष्टि से जागरूक भविष्य के लिए खुद को समर्पित करने वाले इतने सारे बच्चों का जानकारी भरा प्रतिनिधित्व देख कर मैं आश्चर्यचकित हूँ| "

माननीय मंत्री ने भारत सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों में कुछ की जानकारी देते हुए बच्चों को इस सम्बन्ध में कार्रवाई का भरोसा दिया |

 

हम अपने बच्चों के सामने शपथ लेते हैं कि हम अपने कार्यों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हैं और संसाधनों का विवेकपूर्ण प्रयोग कर रहे हैं |

श्रीमती स्मृति ईरानी, माननीय महिला एवं बाल विकास मंत्री

सबसे छोटे जलवायु योद्धा के लिए विषैली हवा चिंता का मुख्य विषय है | दस वर्षीय रवि दिल्ली में रहता है और कहता है कि जिस झुग्गी में वो रहता है, वहां से गुजरने वाली गाड़ियों की संख्या में वृद्धि हुई है |

"इन कारों, बसों और अन्य गाड़ियों से निकलने वाली नुकसानदेह गैसों से हवा प्रदूषित हो रही है और हमें सांस लेने में दिक्कत होती है |"  

साथ में उसने ये भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों को जलाने से भी जहरीली गैसें निकलती हैं |

मैं चाहता हूँ कि हम सब एक ऐसे पर्यावरण में रहें जो शुद्ध हो और धूल और वायु प्रदूषण से मुक्त हो |

दिल्ली से 10 वर्षीय रवि

इस सत्र के पश्चात् एक प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमे बच्चों के लिए संसदीय समूह के माननीय सांसदों ने पर्यावरणीय मुद्दों पर की जा रही कार्रवाइयों के बारे में बच्चों के प्रश्नों का जवाब दिया |

बच्चों के लिए संसदीय समूह की संयोजिका और माननीय सांसद वंदना चवान ने राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं अनुकूलन रणनीतियों, नीतियों और योजना दस्तावेजों में बाल - अधिकारों के स्पष्ट एकीकरण की वकालत की |

उन्होंने कहा, "जलवायु नीतियों के नायकों के रूप में बच्चों और युवा लोगों को शामिल कर, हम ऐसे समाधान खोज सकते हैं जो आने वाले सालों और दशकों में क्रियान्वित हो सकेंगे |

इस वार्ता की समाप्ति करते हुए, यूनिसेफ इंडिया की राष्ट्रीय प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक़ ने बच्चों से अपनी उम्मीदें, भय और समाधान साझा करते रहने का अनुरोध किया और उन्होंने ज़िम्मेदार लोगों से बच्चों से लगातार ये जानने का अनुरोध किया कि वे क्या चाहते हैं | डॉ. हक़ ने कार्रवाई की तात्कालिकता पर भी ज़ोर दिया |

ये पूरे देश के बच्चों के लिए कठिन समय है और इसने ये दिखा दिया कि किस प्रकार महामारी से निबटना बाल केंद्रित होना चाहिए | वर्तमान महामारी ने ये दिखाया कि कितनी तेजी से वैश्विक खतरे बढ़ते और फैलते हैं और क्यों जलवायु परिवर्तन से होने वाले बड़े खतरों से दुनिया को बचाने के लिए समय पर कार्रवाई और उसके लिए तैयार होना महत्वपूर्ण है |

डॉ. हक़ ने कहा, "भारत के बच्चों, हम आपको सुन रहे हैं और जैसा भविष्य चाहते हैं और जो आप का हक़ है उसके निर्माण के लिए कार्यरत हैं |"

यूनिसेफ इंडिया और बच्चों से जुड़कर जानिए कि कैसे आप कार्रवाई के लिए सामान्य कदम उठा सकते हैं और अपने समुदाय के लिए जलवायु योद्धा बन सकते हैं |