अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

मिलिए बिहार की हिम्मती लड़कियों से जो सभी विपरीत परिस्थितियों से संघर्ष कर के खेलकूद में चैंपियन बनीं।

यूनिसेफ़ इंडिया
बिहार की युवा खेल चैंपियन
यूनिसेफ़ इंडिया
17 मार्च 2021

20 वर्षीय अमृता राज से मिलिए

" पहले लड़कियाँ कराटे खेलने नहीं आती थीं, वो सोचती थीं कि ये लड़कियों का खेल नहीं है, लेकिन मुझे देख कर धीरे-धीरे और लड़कियाँ भी आने लगीं | बाद में मुझे परिवार और शिक्षकों का सहयोग भी मिलने लगा |

अब मैं और बच्चों को भी कराटे सिखाती हूँ | कराटे खेलने के कारण मेरा खेल कोटे से बी.एससी. (नर्सिंग) में प्रवेश हो गया |

अमृता राज बिहार में किलकारी अभियान का भाग हैं |

किलकारी मानव संसाधन शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न राज्यों में स्थापित राज्य 'बाल भवन' है | यूनिसेफ के सहयोग से किलकारी की शुरुआत 2008 में हुई और इसे बिहार सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त है |

बिहार की युवा चैंपियन
यूनिसेफ़ इंडिया
चांदनी खातून, 18, बाल-बैडमिंटन, किलकारी बिहार बाल भवन

18 वर्षीय चाँदनी खातून से मिलिए

"जब मैंने मम्मी से कहा कि मुझे खेलने के लिए बहार जाना है, तो उन्होंने मना कर दिया कि तुम केवल किलकारी में खेल सकती हो, और बाहर खेलने जाने से मना कर दिया |   

"जब मैं अवार्ड जीत कर लाई तो मम्मी को अच्छा लगा | तब उन्होंने मुझे बाहर जा कर खेलने की अनुमति दे दी | " किलकारी से हमें बहुत सुविधा और स्कालरशिप मिली | अंततः मम्मी हमें बाहर भेजने को मान गई और अनुमति दे दी |किलकारी 8 से 16 वर्ष के बच्चों के साथ काम करती है |

इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में फाइन आर्ट्स, परफार्मिंग आर्ट्स, क्राफ्ट, रचनात्मक लेखन और खेल आदि सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में प्रशिक्षण द्वारा रचनात्मकता और आत्मविश्वास पैदा करना है |

बिहार की युवा खेल चैंपियन
यूनिसेफ़ इंडिया
कोमल कुमारी, 21, भागलपुर, कुश्ती, किलकारी बिहार बाल भवन

मिलिए 21 वर्षीय कोमल कुमारी से

"मैं जिस समाज से आती हूँ, वहाँ लड़कियों को कुश्ती खेलने से मना किया जाता है | लड़कियाँ, लड़कों से भी ज्यादा कर सकती हैं, कुछ बन सकती हैं| कुछ कर के दिखा सकती हैं लड़कियाँ |"

किलकारी में विभिन्न सह पाठ्यक्रम गतिविधियां बच्चों को उनकी उम्र, योग्यता और क्षमता अनुसार सहभागिता, प्रयोग, निर्माण, प्रदर्शन और योगदान करने का एक प्लेटफार्म प्रदान करती है |

बिहार की युवा खेल चैंपियन
यूनिसेफ़ इंडिया
पिंकी कुमारी, 17, बाल-बैडमिंटन, किलकारी बिहार बाल भवन

मिलिए 17 वर्षीय पिंकी कुमारी से

"मुझे राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए मणिपुर जाना था, तो मम्मी तो मान गई लेकिन शुरू में पापा नहीं तैयार थे | जब मैं मैच जीतने लगी तो मम्मी-पापा बोले कि तुम हमारा नाम रोशन करो |"

किलकारी में पंजीकृत अधिकांश बच्चे समाज के सर्वाधिक हाशिए पर स्थित वर्ग से हैं | यूनिसेफ और अन्य प्रमुख भागीदारों के साथ निकट सहयोग में किलकारी बाल-अधिकारों के प्रोत्साहन में सक्रिय रूप से शामिल है, विशेष रूप से बच्चों की भागीदारी |

बिहार की युवा खेल चैंपियन
यूनिसेफ़ इंडिया
पूजा कुमारी, 17, बाल-बैडमिंटन, किलकारी बिहार बाल भवन

17 वर्षीय पूजा कुमारी से मिलिए

"जब मैं खेलना शुरू की तो मम्मी-पापा और समाज के लोग मना करते थे कि लड़कियाँ ये सब नहीं खेलतीं, केवल लड़के खेलते हैं | लेकिन मैं अपने लिए लड़ी कि मुझे ये करना है और आगे बढ़ना है | किलकारी से मिले सहयोग से मेरा हौसला बुलंद हुआ | जब में राष्ट्रीय स्तर पर खेल कर लौटी तो मुझे खूब तारीफ मिली|

जब मैं राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा पुरस्कार पा कर लौटी, तो घर समाज और स्कूल के लोग बहुत खुश हुए | इससे मुझे लगा कि मैं आगे चलकर बहुत कुछ कर सकती हूँ |

किलकारी की शुरुआत से ही यूनिसेफ इसकी यात्रा से जुड़ा रहा है | पिछले कुछ सालों में किलकारी बिहार में एक उत्कृष्टता के संस्थान के रूप में उभरा है | .